खराब परिस्थिति में भी नये मौके:

जैसे कहानी के सीर्षक से पता चल रहा है कि ये कहानीं हमें बताएगी कि कैसे खराब परिस्थितियां भी हमारे लिए नये मौके लेकर आती हैं बस हमें उन मौकों को तलाशने की सोच होनी चाहिए। ये प्रेरणा से भरपूर कहानीं बडी ही रोचक और प्रेरणादायक हैं

साधु और शिष्य की रोचक प्रेरणादायक कहानीं



साधु और शिष्य की प्रेरक कहानी:-

कभी कभी खराब परिस्थितियां भी हमें नये मौके देती है

एक बार की बात है एक गरीब आदमी अपने परिवार के साथ  गाव से दूर जंगल मे एक झोपडी मे रहता था। एक दिन वहां एक बहुत बडे साधु गुरूजी आये गुरूजी के साध उसका शिष्य भी था। शाम का समय हो गया था। गुरूजी और शिष्य दोनो गरीब आदमी की झोपड़ी के पास गये और गरीब आदमी से कुछ खाने के लिए मागां। गरीब आदमी ने उन्हें कुछ मीठे आम लाकर दिये। 

गुरुजी और शिष्य ने आम खाये और अपनी भूख मिटाने के बाद वहाँ से चलने को कहा अब रात हो चुकी थी इसलिए आदमी ने गुरूजी और शिष्य को अपने पास ही ठहरने के लिए कहा गुरूजी ने  पहले तो मना किया लेकिन ज्यादा कहने पर गुरुजी वही ठहरने के लिए मान गये। सोने का समय आ गया गुरूजी ने गरीब आदमी से पूछा कि आप क्या काम करते हो तो इस पर गरीब आदमी ने कहा मेरी झोपडी के पास एक आम का पेड हैं हम उस पर लगे आमों को खाकर गुजारा करते हैं। बस ऐसे ही सबकुछ चल रहा है। बातें करते हुए रात ज्यादा हो गयीं थी नींद आने लगी और सब सो गये रात मे गुरूजी की आखें खुली उसने अपने शिष्य को जगाया और बोला ऐसा करो ये पास मे जो आम का पेड़ हैं उसे तुमको जड से काटना है और ध्यान रहे कि किसी को पता भी नहीं लगना चाहिए। 

शिष्य बोला गुरुजी इस आदमी ने आपको खाना खिलाया आपको यहां रूकने के लिए कहा और आप उस पेड़ को कटवाना चाहते हो जिससे उसका जीवन चल रहा है। शिष्य ने गुरु जी से कहा एक बार और सोच लो आप ये ठीक नहीं कर रहे हों। ये किसी के पेट पर लात मारने से कम नहीं है। गुरु जी ने कहा मैं जितना कह रहा हूँ उतना करो। शिष्य ने सोचा चलो गुरूजी कह रहे हैं तो ठीक है और आम के पेड को काट दिया फिर बिना बताए वहाँ से चले गये। जाते समय रास्ते मे शिष्य ने पूछ ही लिया कि गुरु जी आपने उस गरीब आदमी जो बडा सीधा सादा, भोला इंसान था आपने उसके साथ ऐसा क्यों किया ब्लकि आपको उसे कुछ अच्छा ज्ञान देना चाहिए था जिसे वह अपने जीवन मे उपयोग कर सकता था उसका जीवन और बहतर हो सकता था लेकिन आपने तो उसके साथ बहुत गलत  किया है। 

इस पर गुरु जी ने शिष्य से कहा तुम्हें इसका उत्तर चाहिए तो तुम उस गरीब आदमी के पास कुछ दिनो बाद आना तुम्हें उत्तर अपने आप मिल जायेगा। अब शिष्य और गुरु जी अपने कार्य मे लगे रहे। कई साल बीत गये लेकिन इस शिष्य को अपने गुरु जी की बात याद थी और उसे जानने के लिए उत्सुक भी था। शिष्य अपने गुरु से आज्ञा लेकर उस गरीब आदमी का हाल देखने के लिए चल दिया जिसका आम का पेड़ गुरू जी ने कटवा दिया था। शिष्य उसी जगह पहुच गया और वो पुरानी झोपडी खोजने लगा  लेकिन वहां कोई झोपडी ही नही थी। 

शिष्य मन ही मन सोचने लगा कि गुरु जी ने उस आदमी के साथ बहुत बेकार किया था बेचारा भूखा मर गया होगा। या कहीं और चला गया होगा। आसपास देखा तो वहा एक अच्छा सा मकान बना हुआ था शिष्य ने सोचा कि चलो इस मकान मे कोई होगा उसी से उस गरीब आदमी के बारे मे पूछ लेता हूँ। मकान के गेट पर गया। आवाज लगाई तो अन्दर से एक आदमी आया। उसे देखते ही शिष्य चौक गया क्योंकि जो अन्दर से आया वो वहीं आदमी था जो पहले बहुत गरीब था। शिष्य ने भी अपना परिचय दिया और कहा कि मैं अपने गुरु जी के साथ पहले भी आया था जो एक रात आपकी झोपडी मे रूके थे। 

आदमी को भी याद आ गया। वह शिष्य को अन्दर ले गया। शिष्य ने कहा कि आप तो पहले एक पुरानी झोपडी मे रहते थे। आपका केवल एक आम का पेड था जिसके आम खाकर आप गुजारा कर रहे थे। ये इतना अच्छा मकान, ये गाडी आपने ये सब कैसे किया। वो आदमी बोला की जिस दिन आप यहां रूके थे ना जाने किसने मेरे आम के पेड को काट दिया। मैं बहुत परेशान हुआ था। लेकिन कुछ ना होने के कारण  पहले तो मेरे समझ मे कुछ नही आया फिर बाद मे मैंने यहां पड़ी खाली जगह को साफ किया उसमे कुछ फसल लगायी और धीरे धीरे मुझे मुनाफा होता गया फिर मैने और अधिक खेतो को साफ किये उसमे फसल उगाता रहा अब मेरे बहुत बडे खेत हैं और लाखों रूपये की हर साल फसल बेच लेता हूँ। 

अब मेरी जिन्दगी एकदम ठीक हैं। यह सब सुनकर शिष्य भी समझ गया कि गुरु जी ने जो आम का पेड कटवाया था उसी का नतीजा है जो ये आदमी जिसने कभी कमाना सीखा नही था बस अपना पेट भरने को ही जिन्दगी समझता रहा। जिसे किसी और चीजों के बारे मे पता ही नही था उसको एक कामयाब व बडा किसान बना दिया।

यह कहानी हमे सीखाती है कि हमारे जीवन मे भी कभी कभी ऐसा ही आम का पेड़ आ जाता हैं जिसके चक्कर मे हम कुछ और ज्यादा करने की सोच ही नही  पाते है और जैसा पहले होता आया है वैसा ही होता रहता हैं। और हम दोष देते कि मुझे तो कुछ और करने का मौका ही नही मिला।

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