सकारात्मक सोच का महत्व : लघु प्रेक कहानीं

सकारात्मक सोच का महत्व:

इंसान की सोच ही इंसान मजबूती को दर्शाती हैं। मजबूत सोच ही इंसान को मजबूत बनाती हैं। इसलिए हमेशा सकारात्मक सोचे जिससे सकारात्मक परिणाम आये। ये एक छोटी कहीनी आपको सकारात्मक सोच का महत्व बताएगी। कहानीं को पूरा पढ़ें।

सकारात्मक सोच का महत्व प्रेरक कहानीं



जैसा आप सोचते हैं वैसा ही आप बनते है



एक बार की बात है कि किसी गांव के मे एक गरीब आदमी रहता था। जिसका नाम अमरसिंह था। उसका एक लडका भी था। जिसका नाम निगम था। अमरसिंह व निगम किराए के कमरे मे रहते थे। उसकी पत्नी का देहांत एक गंभीर बीमारी के कारण हो गया था। जिसके इलाज में काफी रूपये लगे थे। अमरसिंह एक सेठ के यहां काम करता था। एक दिन निगम ने अपने पिताजी से कहा की मैं भी आपके साथ काम पर जाऊंगा। अमरसिंह के मना करने पर भी लडका नही माना। 



और अमरसिंह के साथ सेठ के यहां चला गया। अमरसिंह सेठ के घर की साफ सफाई का काम करता था। अमरसिंह सेठ की लग्जरी कारो को साफ कर रहा था। और निगम उसे देख रहा था। निगम यह सब देखकर सोच रहा था कि कभी हमारे पास भी ऐसी गाडियां होगी और मेरे पिताजी उनमे बैठेंगे। एक दिन निगम के स्कूल में अध्यापक ने सभी बच्चों को उनके सपनो के बारे मे, जो आप बनना चाहते हो उस पर निबन्ध लिखने को कहा। अगले दिन सभी बच्चे अपनी अपनी जो उन्होके सपने  थे उनपर निबंध लिखकर ले आये। 


अध्यापक ने सभी के निबंध देखे और पास कर दिये। निगम का निबंध देखकर अध्यापक बोले कि तुमने ये क्या लिखा है। तुम ये बडा बंगला, गाडी कहा से लाओगे। और कहा कि मैं तुम्हें एक दिन और देता हूँ तुम ऐसा निबंध लिखकर लाना जो तुम्हारे लिए संभव हो,जो तुम कर सको बेकार मैं जो तुम्हारे लायक ना हो उस पर निबंध मत लिखकर लाना नही तुम्हें फेल कर दिया जाएगा। निगम घर गया और अपने भविष्य मे अपने सपनो को सोचने लगा और लेकिन कोई दूसरा सपना सोच ही नहीं पा रहा था। 


अगले दिन स्कूल में अध्यापक को निबंध दिखाया और बोला कि सर आपको फेल करना है कर दो मेरा तो ये ही सपना है कि मेरे पास बड़ा बंगला,गाड़ी होगी और मैं एक बड़ा अफसर बनूंगा मैं अपना सपना बदलने वाला नहीं हूं। अध्यापक ने ये सब सुनकर निगम को फेल कर दिया। निगम ने अपनी पढ़ाई में बहुत मेहनत की। सभी परीक्षा में अव्वल आता था। कुछ सालों बाद एक ओडिटोरियम में बहुत से लोग स्पीच सुनने के लिए आये हुए थे जिनमें निगम के अध्यापक भी थे और जो स्पीच दे रहा था वो था एक बड़ा अफसर निगम। निगम ने अपने अध्यापकों को देखा और पास जाकर अध्यापक से बोला कि मैं वहीं लड़का हूं जिसको आपने निबंध लिखने पर फेल कर दिया था। आज में कलेक्टर बन गया हूं मेरे पास गाड़ी है बंगला है। जिसके मैं सपने देखता था। अध्यापक को बड़ी सर्मिन्दगी महसूस हुई।

ये छोटी सी कहानी हमें सिखाती है कि हमें जो करना है सिर्फ वही करना है और सिर्फ वही करना है। उसे करने के लिए पुरी महनत करनी चाहिए। एक लक्ष्य बनाकर हम उसे हासिल कर सकते हैं। कैसी लगी आपको ये कहानी कमेंट करके बताए
धन्यवाद!!

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