जीवन को सीख देने वाली कहानी:

अपनी गलतियों या अनुभवों से सीखना ही सफलता का मारग दिखाता है। जीवन के हर मोड पर हमें कुछ न कुछ नया जरूर सीखने को मिलता हैं। इंसान को हमेशा सीखते रहना भी चाहिए ज्ञान की कोई सीमा नहीं है। 

जीवन को सीख देने वाली प्रेरणादायक कहानी



एक कारीगर और उसके बेटे की कहानी

हमेशा सीखते रहना चाहिए


किसी गांव मे एक कारीगर रहता था जिसका एक लड़का था। कारीगर अपनी छोटी सी झोपड़ी मे टोकरी बनाता था जिन्हे वह 20-20 रूपये मे बेचा करता था। अब कारीगर बूढ़ा हो चुका था उसने सोचा कि मैं अपने बेटे को यह टोकरी बनाने का काम सिखाता हूं लड़के से कहा कि तुम उसे सीख लो मैंने तुम्हारे दादा जी से सीखा है। ये हमारी पीढियों से चला आ रहा काम है। 

अच्छा काम हैं। लड़का भी मान गया टोकरी बानने का काम सीखने को। पिताजी ने लडका को टोकरी बनानी सिखायी और उसे बाजार मे बेचकर आने को कहा। लडका टोकरी को लेकर बाजार गया। और बेचकर आया ही था पिताजी ने पूछा कि उदास क्यों हो। लडका बोला कि मेरी बनाई हुई टोकरी केवल दस रूपये मे ही बिकी। पिताजी ने कहा चलो कोई बात नही आज तुम्हें और अच्छी टोकरी बनाना सिखाता हूँ।


 पिताजी ने और अच्छी टोकरी बनाना सिखाई और उसे बाजार मे बेचने को कहा। लडका टोकरी लेकर बाजार गया और अपनी बनाई टोकरी को पंद्रह रूपये मे बेचकर आया। लडका अब भी उदास था। पिताजी ने फिर उदासी का कारण पूछा तो लडके ने कहा कि टोकरी केवल पंद्रह रूपये मे ही बिकी। पिताजी ने कहा कोई बात नही धीरे धीरे तुम्हारी बनाई हुई टोकरी अच्छे दामों मे बिकने लगेगी तुम अच्छे से टोकरी बनाना सिखते रहो। पिताजी ने और अधिक अच्छी टोकरी सिखाई और टोकरी बनाकर बेचने को कहा। लडका बाजार गया और उस दिन उसकी टोकरी 30 रूपये मे बिक गई। लडका बहुत खुश हुआ। पिताजी ने  पूछा कि आज कितने रूपये की टोकरी बेची। लडके ने कहा आज मेरी बनाई टोकरी 30 रूपये की बिकी हैं। 

पिताजी ने यह सब सुनकर लडके से कहा बहुत अच्छा है। चलो आज तुम्हें ऐसी टोकरी सिखाऊंगा जो 40 रूपये मे बिक सके। लडके ने कहा बस पिताजी आप खुद 20 रूपये की टोकरी बेचते आये हो आप मुझे 40 की टोकरी बनाना कैसे सिखाओगे। आप रहने दो आपसे ज्यादा रूपये की टोकरी तो मैं बनाना जानता हूँ। इतना सुनकर पिताजी ने कहा ऐसा ही कुछ मैने भी कहा था जब मेरे पिताजी खुद 15 रूपये की टोकरी बेचते थे और एक दिन मेरी टोकरी 20 रूपये मे बिक गयीं। मेरे पिताजी ने मुझे 25 रूपये की टोकरी सिखाने को कहा था तो मैने भी सिखने के लिए मना कर दिया था। 

और कहा था कि आप खुद 15 की बेचते आये हैं। आपसे ज्यादा की तो बेचकर आया हूँ। और तब से जीवन भर बीस रूपये की ही टोकरी बेचता रहा क्योंकि उससे ज्यादा की टोकरी मैं सीख ही नहीं पाया।

ये कहानी हमे सिखाती है कि हमे थोडा सा सीखने पर यह घमंड नही होना चाहिए कि अब मैं सब कुछ जानता हूँ। क्योंकि ऐसा हो सकता है कि हर कोई  कुछ ना कुछ आपसे अधिक जानता हो। हमे हमेशा कुछ ना कुछ सीखते रहना चाहिए।
कैसी लगी ये कहानी कमेंट करके जरूर बताये।
धन्यवाद!

अन्य कहानियां:


3 Comments

Post a Comment