ईमानदारी की कहानी प्रेरक रोचक लघु कहानी

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ईमानदारी की कहानी छोटी और रोचक कहानीं:

इंसान अपनी ईमानदारी से ही एक अच्छा इंसान बन सकता है वरना बेईमानी से कितना भी धन इकट्ठा कर ले वो भी उसे एक अच्छा इंसान नहीं बना सकता और ना ही कभी खुश रख सकता इस छोटी प्रेरक ईमानदारी की कहानीं मे बहुत कुछ सीखने को मिल सकता है।


इमानदारी ही इंसान को महान बनाती हैं





यह कहानी है राजा और एक ईमानदार बालक की:

पत्थर से उगाये हुए फूल


एक बार की बात है कि एक राज्य का राजा जो बहुत अच्छा राजा था। उसने कभी भी अपने पर घमंड नही किया। अपना राज पाठ बिल्कुल अच्छी तरह से चला रहा था। राजा की उम्र भी ज्यादा हो गई थी। राजा ने सोचा कि क्यों न अपने राज्य का कोई ईमानदारबुद्धिमान व्यक्ति को उत्तराधिकारी बनाया जाये। जो मेरे मरने के बाद राज्य की देखभाल अच्छी तरह से कर सके। राजा ने राज्य का उत्तराधिकारी किसी नवयुवक किशोर को बनाने की योजना बनाई। राजा ने किसी ईमानदार व बुद्धिमान किशोर की खोजना शूरू किया मगर कोई नही मिला।
राजा ने एक और योजना बनाई। राजा ने अपने राज्य के कुछ लोगो को बुलाया और उन्हें कुछ अलग अलग तरह के  फूलों के पोधो के बीजो को सभी को थोड़े थोड़े बाट दिये और बोला कि आपके पास दो महीने का समय हैं जो व्यक्ति इन बीजो से अच्छे फूल उगा कर लायेगा उसे ही राज्य का राजा बना दिया जायेगा। सभी थोड़े थोड़े बीज लेकर अपने घर चले गये सभी ने महनत की। रोज पानी देना। खाद्य देना। समय बीतता गया आखिर वो समय आ गया जब राजा ने सभी को अपने फूल दिखाने को बुलाया। सभी अपने फूल लेकर दरबार में आ गए। सब बारी बारी से अपने फूलो के गमले दिखाने लगे। सभी के अच्छे फूल थे।
राजा ने सब की तारीफ की। आखिर में बस एक बच्चा बच गया जिसने अपना खाली गमला अपने हाथो मे ले रखा था। बच्चा बडा ऊदास था। लेकिन आश्वस्त भी था कि उसने महनत तो बहुत की हैं अगर कुछ नहीं हुआ तो वो क्या कर सकता हैं। सभी लोग उस बच्चे पर हसने लगे उसका मजाक उडानें लगे। वह बच्चा राजा के पास गया अपना खाली गमला दिखाया। राजा ने जैसे ही खाली गमला देखा।
राजा की अपने राज्य के उत्तराधिकारी की तलाश पूरी हो गई। राजा ने उस बच्चे को अपने पास बुलाया और पूछा कि आपके गमले मे फूल के पौधे क्यों नही उगे। बच्चे ने जवाब दिया कि मैने महनत तो बहुत की लेकिन कोई भी फूल का पौधा नही उगा पाया। शायद मेरी महनत कुछ कम रह गयी हो। राजा ने उस बच्चे से कहा कि आपने बहुत अच्छी व ईमानदारी भरी महनत की है जो ये सब लोग नही कर सके। ये सभी बेईमान लोग है। क्योंकि मैने जो बीज दिये थे वो सभी पत्थर के बने बीज थे। अब भला पत्थर के बीजो से कौन फूल उगा सकता हैं। सभी लोग एकदम चुप हो गये और अपने किये पर सर्मिन्दा होन लगे। राजा ने बच्चे के ईमानदारी व धैर्य के लिए उसे अपने राजा का अगला राजकुमार बना दिया।
हमे अपनी पूरी लग्न व ईमानदारी से अपना कार्य करना चाहिए। उसके प्रतिफल की हमे चिंता नहीं करनी चाहिए। क्योंकि जैसी आपने महनत की है वैसा आपको उसका फल जरूर मिलेगा।
धन्यवाद


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