जीवन मे हैं खुशियां अनेक जरूरत हैं ढूंढने की|Happiness Story In Hindi


Best short real life inspirational stories in hindi

दूसरो से तुलना किये बिना सोचोगे तो पाओगे कि खुश रहने के लिए सब कुछ तो हैं अपने पास
जिन्दगी हैं बहुत खुबसूरत
जीवन मे खुशियां  कहानीं आपकी सोच बदल देगी। इस कहानीं को पढ़कर आप भी सोचने लगेंगे कि वास्तव मे हमारे पास खुश रहने के लिए सब कुछ तो है Real Life Happiness Story In Hindi कहानीं आपको समझने मे मदद करेगी कि किस तरह हम दूसरों के लिए भी बहुत कुछ कर सकते हैं जिससे उन्हें खुशी मिले इसलिए कहानीं को पूरा जरूर पढें

जानिए खुश रहने के लिए क्या नही है आपके पास


दिपावली का त्यौहार था दिपावली से पहले सभी अपने मकान की साफ सफाई करते है। इस बार मकान मालिक ने अपने रसोई मे रखे एक टिफिन जिसमे तीन कटोरी थी और उनकेे ऊपर एक ढक्कन था अब टिफिन के सबसे ऊपर की कटोरी का ढक्कन थोडा सा टूट सा गया था। टिफिन बहुत महगा था लेकिन मालिक धनतेरस पर एक और अच्छा और काफी महगा टिफिन ले आये। और पुराना टिफिन को घर के एक कोने मे फेंक दिया। अगले दिन सफाई करने वाली जिसका नाम रामा था वो घर की सफाई करने के लिए आई तो उसने देखा कि टिफिन कोने मे पडा हैं। उसने टिफिन को उठाया और बाकी बरतनों के साथ उसे भी साफ करने लगी। इतने मे मालकिन ने देखा कि पुराना टिफिन जिसको अलग फेंक दिया था रामा उसे भी साफ कर रही हैं मालकिन ने रामा से कहा कि अब इस टिफिन को धोने की जरुरत नही है इसकी जगह एक और अच्छा टिफिन आ गया है। अब इसे किसी कबाड़ी को बेच देना। ये हमारे काम का नही है। इतना सुनकर रामा ने थोड़ा डरते हुए मालकिन से कहा कि क्या इस टिफिन को मैं ले सकती हूँ मालकिन ने कहा हा क्यू नही इसे तुम ही ले लेना। काम करने के बाद जब अपने घर जाओ तो इसे भी लेते जाना। इतना सुनकर रामा तो खुशी के मारे झुम ऊठी जैसे उसे कोई हीरा मिल गया हो और बार बार उस टिफिन को ही देख रही थीं। आज खुशी इतनी थी कि पता ही नही चला कब साफ सफाई का काम खत्म कर लिया। काम खत्म करने के बाद अब रामा टिफिन को लेकर अपने घर आ गयी। ऊधर रामा का पति भी एक चपरासी की नौकरी करता था जो एक बहुत पुराने से टिफिन मे खाना ले जाया करता था। रामा सोचने लगी कि मैं रोज अपने पति को उस पुराने टिफिन की जगह इसमे ही लंच दिया करूगीं। और रामा ने भी अपना पुराना टिफिन को निकाल कर एक कोने मे रख दिया। और अपने पति को मालकिन द्वारा दिये गये टिफिन मे खाना पैक करके देने लगी। रामा का पति भी मालकिन के टिफिन मे अपना लंच देखकर बडा खुश होता था।

Real Life Happiness Story In Hindi

सबकुछ ठीक चल रहा था
फिर एक दिन रामा के घर पर एक भिखारी आया जो रामा से कुछ खाने को मांगने लगा रामा को काम पर जाना था वो काम पर जाने के लिए लेट ना हो जाये इसलिए रामा ने सोचा कि क्यों ना अपने पहले वाले टिफिन मे खाना डालकर भिखारी को दूं वो टिफिन मेरे अब किस काम का हैं। और इससे ये भिखारी टिफिन को ले जा कर कहीं भी खाने को खा सकता हैं। और मैं अपने काम पर जाने के लिए लेट भी नही होगीं रामा ने ऐसा ही किया उसने अपने पहले वाले टिफिन मे खाना पैक करके भिखारी को दे दिया और कहा कि मुझे अपने काम पर भी जाना है मुझे देर हो रही हैं आप ये टिफिन लीजिए इसमे मैंने खाना पैक कर दिया है आप कही भी इस खाने को खा सकते है।

और ये टिफिन भी आप ही रख लेना ये तुम्हारे काम आ सकता है। इतना सुनकर भिखारी की तो भूख जैसे खत्म ही हो गयी हो। टिफिन को पा कर ऐसे खुश होने लगा जैसे कोई लोटरी ही लग गयी हो। उसे खाना मिलने की इतनी खुशी नही थी जितनी उस टिफिन के मिलने की थी।

जीवन मे खुशियां भरने वाली प्रेरक कहानीं
तो देखा दोस्तों आपने
जिस टिफिन को मालकिन ने पुराना या खराब समझकर फेकने का फैसला कर लिया था। वो मालकिन के लिए बेसक कबाड़ ही था लेकिन रामा के लिए किसी अच्छे और Branded टिफिन से कम नही था।

उसी तरह रामा के लिए उसका टिफिन भी खराब ही था जो भिखारी के लिए भी किसी अच्छे टिफिन से कम नही था। रामा और भिखारी दोनो पुराने टिफिन को लेकर भी कितने खुश थे।

ये कहानी हमे दो बातें सिखाती है

पहली कि हम हमेशा ये सोचकर परेशान होते रहते है कि हमारे पास ये नहीं है वो नहीं हैं हमारे पास इस चींज की कमी हैं हमे ये मिल जाये तो कितना अच्छा होगा लेकिन कभी ये नही सोचते कि हमारे पास क्या है। हम कितने खुशनसीब है कि हमारे पास वो है जो काफी लोगों के पास नही है। तो दोस्तों जो आपके पास है चाहे वो कुछ भी हो, धन हो या कोई वस्तु हो उसे सही से इस्तेमाल करना सीखें ना कि उससे भी अच्छे की चाह मे उसका भी ठीक से इस्तेमाल ना कर पाये।

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दूसरी बात ये कि हम अपनी पुरानी चीजों को चाहे वो कुछ भी हो कोई किताब हो, कपडें हो या कोई और सामान उसको पुराना समझकर फेंक देते है एक बार भी ये नही सोचते कि ये हमारे लिए पुराना या बेकार हो सकता है लेकिन किसी के लिए किसी नये Branded चींज से कम नही होता। इसलिए जो सामान हमारे लिए पुराना हो चुका हो उसे हम किसी जरूरतमंद को दे सकते हैं। जिससे उसे खुशी मिल सके सही मायने मे दूसरों को खुशी देना ही तो जिन्दगी हैं।


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